योग
योग हमारा कर्म ही है।
योग हमारा धर्म ही है।
योग से नाता जोडो सभी ये,
सुख शांती खुशी लाता है। ।।धृ।।
प्राणायाम से निरोगी शरीर,
निर्भय मन बन जाता है।
सूर्य नमस्कार और सभी आसन,
तन मन को बल देते है। । १।
योग हमारा——–
हस्तमुद्रा और शवासन से,
रोग मुक्त हो जाते है।
डाल, रोटी, सब्जी, फल खाकर,
पिझ्झा, बर्गर हटाना है। । २।
योग हमारा———-
एक साथ मिल-जुलकर रहना,
साथ में योगा करना है।
नीत योगा करके अपना,
जीवन निरोगी रखना है। । ३।
योग हमारा कर्म ही है।
योग हमारा धर्म ही है।
सौ. आशा व्यास, नवीन पनवेल







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